पवित्र “जमकरान मस्जिद”, कोम शहर, ईरान, पर “लाल परचम” फहरा दिया गया है। लाल परचम फहराने का मतलब बदला लेने की क़सम और एलान ए जंग है।
ये मरते दम तक ए’लान ए जंग है। लाल परचम फहराने के बा’द क़दम पीछे नहीं हटाए जाते हैं।
जमकरान मस्जिद शिया मुसलमानों के 12 वें इमाम ने तामीर की थी। इस मस्जिद में सिर्फ़ एक गुम्बद है। यही इस मस्जिद की ख़ासियत है।
इस लाल परचम पर ‘अरबी में लिखा होता है “ऐ हुसैन का बदला लेने वालों” इससे पहले भी कई मौक़ों’ पर ईरान ने जमकरान मस्जिद पर लाल परचम फहरा कर बदला लिया है। पूरी दुनिया में अमरीका और इसराईल के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा बढ़ता जा रहा है। ट्रम्प और नेत्यांहू को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। मगर ‘आम अमरीकी और यहूदियों की जान पर ख़तरा बना रहेगा।
ख़ामेनई की शहादत का इन्तिक़ाम लेना एक जज़्बाती मुद्दा’ है। मगर जंग से कुछ भी हासिल नहीं होगा। वाहिद हल यही है कि अमरीका और इसराईल ईरान पर हमला बंद करे,
