Senior Advocates on Rape attempt: ‘भगवान ही बचाये इस देश को…महिला के प्राइवेट पार्ट को छूने को रेप का प्रयास न मानने वाली इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी पर भड़के सीनियर एडवोकेट
Senior Advocates on Rape attempt:
नई दिल्ली: Senior Advocates on Rape attempt- यौन अपराध से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी की क़ानून विशेषज्ञों ने शुक्रवार को कड़ी निन्दा की है। विदित हो कि हाईकोर्ट ने रेप के प्रयास के एक मामले में निर्णय सुनाते हुए कहा था कि “किसी लड़की के निजी अंग को पकड़ना व उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना दुष्कर्म अथवा दुष्कर्म के प्रयास का मामला नहीं माना जा सकता है।”
इस मामले में सीनियर एडवोकेट व सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा कि “भगवान ही इस देश को बचाये.. क्योंकि पीठ में इस प्रकार के न्यायाधीश विराजमान हैं।” उन्होंने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट भी ग़लती करने वाले ऐसे जजों से निपटने के मामले में बहुत ही नरम रहा है।” (Senior Advocates on Rape attempt)
कपिल सिब्बल ने कहा कि “मुझे लगता है कि इस प्रकार की विवादास्पद टिप्पणी करना बहुत हिबअनुचित है। क्योंकि वर्तमान में न्यायाधीश जो कुछ भी कहते हैं उससे समाज में एक सन्देश जाता है। यदि न्यायाधीश, विशेषकर हाईकोर्ट के जस्टिस इस प्रकार की टिप्पणियाँ करते हैं तो इससे समाज में बहुत ही ग़लत सन्देश जायेगा और जनता का न्याय पालिका से तो भरोसा ही उठ जायेगा।” (Senior Advocates on Rape attempt)
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियों से ही लोगों का ज्यूडिशियरी से भरोसा उठता जा रहा है। वहीं इस मामले पर सीनियर एडवोकेट व पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता पिंकी आनन्द का कहना है कि “मौजूदा समय मे, विशेषकर सतीश बनाम महाराष्ट्र राज्य जैसे मामलों के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय ने बलात्कार के प्रयास जैसे जघन्य अपराध को भी बहुत ही कमतर करके आंका है, जो कि न्याय का उपहास है।”
सीनियर एडवोकेट व पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता पिंकी आनन्द ने PTI-भाषा से कहा कि “लड़की के निजी अंगों को पकड़ने, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ने और उसे घसीटकर पुलिया के नीचे ले जाने का प्रयास करने और सिर्फ़ हस्तक्षेप के बाद ही भागने जैसे तथ्यों के मद्देनज़र यह मामला पूरी तरह से बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में ही आता है। यहाँ 11 साल की नाबालिग़ लड़की के साथ बलात्कार की मंशा से हर सम्भव हरकत की गयी।” (Senior Advocates on Rape attempt)
सीनियर एडवोकेट व पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता पिंकी आनन्द ने कहा कि “अब पुन: जागृत होने का वक़्त आ गया है। क़ानून का उल्लंघन करने वालों, महिलाओं व बच्चों के विरुद्ध अपराध करने वालों को क़तई बख़्शा नहीं जाना चाहिये। और इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह निर्णय त स्पष्ट रूप से ग़लत है।”
इस पर सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा का कहना है कि “इलाहाबाद हाईकोर्ट की यह टिप्पणी बलात्कार के प्रयास की संकीर्ण परिभाषा देकर एक चिन्ताजनक मिसाल क़ायम करती हुई प्रतीत होती है। इस प्रकार के निर्णय से यौन हिंसा के पीड़ितों की सुरक्षा के प्रति न्यायिक प्रणाली की प्रतिबद्धता में लोगों का विश्वास कम होने का ख़तरा है। ऐसे निर्णय पीड़ितों को आगे आने से भी हतोत्साहित कर सकते हैं। क्योंकि उन्हें भय होगा कि उनके साथ हुई ऐसी हरकतों को या तो बहुत कमतर आंका जायेगा या फ़िर उन्हें ख़ारिज कर दिया जायेगा।”
वरिष्ठ अधिवक्ता पी०के दुबे ने भी सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा की राय से सहमति जताते हुए कहा कि “इलाहाबाद हाईकोर्ट की इस प्रकार की व्याख्या अनुचित थी। यहाँ न्यायाधीश के निजी विचारों के लिये कोई स्थाननहीं है, और उन्हें स्थापित क़ानून व न्यायशास्त्र का पालन करना चाहिये।” (Senior Advocates on Rape attempt)
बता दें कि यह मामला यूपी के कासगंज में 11 वर्षीय एक लड़की से जुड़ा हुआ है। जिस पर वर्ष- 2021 में 2 लोगों ने इस नाबालिग़ लड़की के प्राइवेट पार्ट पकड़े थे और उसकी सलवार का नाड़ा तोड़कर उसे पुलिया के नीचे लेकर जाने का प्रयास किया था। (Senior Advocates on Rape attempt)
लेकिन अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की बेंच ने जो निर्णय सुनाया वह बहुत ही आपत्तिजनक और हैरान कर देने वाला है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि “केवल निजी अंगों को पकड़ना व पायजामा का नाड़ा तोड़ना बलात्कार या बलात्कार के प्रयास जैसे अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। बल्कि ऐसा अपराध केवल किसी महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला करने अथवा आपराधिक बल प्रयोग के दायरे में आता है।”
स्रोत: ABP News
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